Transliteration: (Wal mu'minoona wal mu'minaatu ba'duhum awliyaaa'u ba'd; ya'muroona bilma'roofi wa yanhawna 'anil munkari wa yuqeemoonas Salaata wa yu'toonaz Zakaata wa yutee'oonal laaha wa Rasoolah; ulaaa'ika sayarhamu humul laah; innallaaha 'Azeezun Hakeem)
इससे हम सीखते हैं कि मुसलमान आपस में दोस्त और एक-दूसरे के हिमायती हैं।
जहाँ अल्लाह फ़रमाता है: "तो अल्लाह के मुक़ाबले में न तो तुम्हारा कोई हिमायती होगा और न मददगार" (सूरा बक़रा 2:120) — इसका मतलब यह है कि अल्लाह की मुख़ालिफ़त में तुम्हारा कोई दोस्त या मददगार नहीं। इसलिए अल्लाह के सिवा दोस्त, अल्लाह के दोस्तों से अलग है।
यह भी याद रहे: मोमिनों की यह दोस्ती मौत के बाद ख़त्म नहीं होती, बल्कि जारी रहती है।
अल्लाह मोमिनों पर इन तरीक़ों से रहम करता है:
रिवायात के मुताबिक़ ये पाँच नेमतें पाँच वक़्त की नमाज़ की वजह से मिलती हैं। (रूहुल बयान)
अल्लाह जिसे देता है, उससे कोई नहीं छीन सकता, और जिसे नहीं देता, उसे कोई नहीं दे सकता। नबी और औलिया अल्लाह से दुआ करते हैं ताकि वह उनके मुरीदों को अता करे।
अल्लाह की मुख़ालिफ़त में कोई कुछ नहीं कर सकता।
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