कुरान - 9:75 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
۞وَمِنۡهُم مَّنۡ عَٰهَدَ ٱللَّهَ لَئِنۡ ءَاتَىٰنَا مِن فَضۡلِهِۦ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ,

Transliteration: (Wa minhum man 'aaha dal laaha la'in aataanaa min fadlihee lanas saddaqanna wa lanakoonanna minassaaliheen)

और उनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने अल्लाह से अहद किया था कि अगर उसने हमें अपने फ़ज़ल से दिया, तो हम ज़रूर सदक़ा देंगे और ज़रूर नेक लोगों में से हो जाएँगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 75 की तफ़्सीर

✅ अल्लाह से अहद करना

यह आयत उन लोगों का ज़िक्र करती है जिन्होंने अल्लाह से अहद किया था कि अगर वह उन्हें अपने फ़ज़ल से मालदार करे, तो वे सदक़ा देंगे और नेक बनेंगे।

इसका इशारा सअ़्लबा बिन हातिब जैसे लोगों की तरफ़ है, जिन्होंने दौलत मिलने पर अच्छे रवैये का वादा किया, लेकिन बाद में अपने वादे से मुकर गए (जैसा अगली आयत में बयान होगा)।

इससे हम सीखते हैं कि अल्लाह से किया गया अहद पूरा करना लाज़िमी है, और दौलत मिलने पर सब्र और शुक्र की परीक्षा होती है।

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