कुरान - 9:85 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
وَلَا تُعۡجِبۡكَ أَمۡوَٰلُهُمۡ وَأَوۡلَٰدُهُمۡۚ إِنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ أَن يُعَذِّبَهُم بِهَا فِي ٱلدُّنۡيَا وَتَزۡهَقَ أَنفُسُهُمۡ وَهُمۡ كَٰفِرُونَ,

Transliteration: (Wa laa tu'jibka amwaaluhum wa awlaaduhum; innamaa yureedul laahu any yu'azzibahum bihaa fid dunyaa wa tazhaqa anfusuhum wa hum kaafiroon)

और उनके माल और औलाद से तुम हैरान न हो। अल्लाह तो बस यही चाहता है कि उन्हें दुनिया में इन चीज़ों के ज़रिए अज़ाब [234] दे, और उनकी जानें निकलें इस हालत में कि वे काफ़िर हों [235]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 85 की तफ़्सीर

✅ [234] माल और औलाद का धोखा

यह आयत बताती है कि मुनाफ़िक़ों का माल और औलाद अल्लाह की रज़ा की निशानी नहीं, बल्कि उनकी सज़ा का ज़रिया है। अल्लाह उन्हें इन दुनियावी चीज़ों में इतना मशरूफ़ रखना चाहता है कि वे अल्लाह को याद ही न कर सकें।

यह सिखाता है कि जो माल या औलाद अल्लाह की याद में रुकावट बने, वह नापाक और इंसान के लिए आख़िर में बुरा है, क्योंकि वह ज़िंदगी के असल मक़सद से भटका देता है।

✅ [235] दुनियावी ख्वाहिशों से लगाव

यह आयत यह भी बताती है कि माल और औलाद की पूरी मोहब्बत उन्हें अल्लाह की तरफ़ ध्यान देने से रोकेगी। मौत तक दुनियावी ख्वाहिशों से उनका लगाव उन्हें अल्लाह की हिदायत की तलाश से दूर रखेगा।

अल्लाह हमें इस बुराई से बचाए, जहाँ दुनियावी चीज़ें रूहानी तरक़्क़ी और इबादत में रुकावट बन जाएँ।

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