Transliteration: (Wa laa tu'jibka amwaaluhum wa awlaaduhum; innamaa yureedul laahu any yu'azzibahum bihaa fid dunyaa wa tazhaqa anfusuhum wa hum kaafiroon)
यह आयत बताती है कि मुनाफ़िक़ों का माल और औलाद अल्लाह की रज़ा की निशानी नहीं, बल्कि उनकी सज़ा का ज़रिया है। अल्लाह उन्हें इन दुनियावी चीज़ों में इतना मशरूफ़ रखना चाहता है कि वे अल्लाह को याद ही न कर सकें।
यह सिखाता है कि जो माल या औलाद अल्लाह की याद में रुकावट बने, वह नापाक और इंसान के लिए आख़िर में बुरा है, क्योंकि वह ज़िंदगी के असल मक़सद से भटका देता है।
यह आयत यह भी बताती है कि माल और औलाद की पूरी मोहब्बत उन्हें अल्लाह की तरफ़ ध्यान देने से रोकेगी। मौत तक दुनियावी ख्वाहिशों से उनका लगाव उन्हें अल्लाह की हिदायत की तलाश से दूर रखेगा।
अल्लाह हमें इस बुराई से बचाए, जहाँ दुनियावी चीज़ें रूहानी तरक़्क़ी और इबादत में रुकावट बन जाएँ।
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