कुरान - 9:87 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

87
رَضُواْ بِأَن يَكُونُواْ مَعَ ٱلۡخَوَالِفِ وَطُبِعَ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَهُمۡ لَا يَفۡقَهُونَ,

Transliteration: (Radoo bi ai yakoonoo ma'al khawaalifi wa tubi'a 'alaa quloobihim fahum laa yafqahoon)

उन्होंने पसंद किया कि वे पीछे रह जाने वालों के साथ रहें, और उनके दिलों पर मुहर [239] लगा दी गई, तो वे कुछ समझते नहीं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 87 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 87 की तफ़्सीर

✅ [239] दिलों पर मुहर

इससे मुराद यह है कि ये लोग आगे भी इस्लाम क़बूल नहीं करेंगे। उनके दिलों पर उनके कुफ़्र और निफ़ाक़ की वजह से मुहर लगा दी गई, जो उन्हें हक़ को समझने और क़बूल करने से रोकती है।

उनके दीन से इनकार ने यह रूहानी रुकावट पैदा की, जिससे वे इस्लाम के पैग़ाम को समझ ही नहीं सकते।

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