कुरान - 9:89 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

89
أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُمۡ جَنَّـٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ,

Transliteration: (A'addal laahu lahum Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa; zaalikal fawzul 'azeem)

अल्लाह ने उनके लिए ऐसी जन्नतें तैयार की हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं, जिनमें वे हमेशा रहेंगे। यही बड़ी कामयाबी है [242]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 89 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 89 की तफ़्सीर

✅ [242] इस आयत से निकलने वाली बातें

इस आयत से कई अहम बातें निकलती हैं:

  • जन्नत की नेमतें पहले से मौजूद हैं: जन्नत की तमाम नेमतें, जिनमें बाग़ और नहरें शामिल हैं, अल्लाह ने पहले ही पैदा कर रखी हैं। ये नेमतें उन मोमिनों के लिए पहले से तैयार हैं जो इनका आनंद लेने वाले हैं।
  • ये नेमतें हक़दारों के लिए मुक़र्रर हैं: जन्नत के इनाम ख़ास तौर पर हक़दारों के लिए मुक़र्रर किए गए हैं। मिसाल के तौर पर मेराज की रात नबी करीम ﷺ ने जन्नत में अपने मुरीदों के लिए बने बाग़ और महल देखे। बाद में आपने कुछ सहाबा को बताया कि उन्होंने क्या देखा — इन नेमतों की अज़मत और वुसअत को ज़ाहिर करते हुए।
  • जन्नत वालों को पूरी मिल्कियत मिलेगी: जन्नत में दाख़िल होने वाले महज़ मेहमान या ग़ैर-मालिक नहीं होंगे। उन्हें अपने बाग़ों और घरों की पूरी मिल्कियत होगी। मेहमानों की तरह वे तमाशा और नेमतें तो पाएँगे ही, साथ ही जन्नत में अपनी जगह के सच्चे मालिक होंगे, जहाँ उन्हें हमेशा की ख़ुशी और मुकम्मलियत नसीब होगी।

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