Transliteration: (Innamas sabeelu 'alal lazeena yasta'zinoonaka wa hum aghniyaaa'; radoo biany-yakoonoo ma'al khawaalifi wa taba'al laahu 'alaa quloobihim fahum laa ya'lamoon)
यह आयत उन लोगों के बारे में है जिनके पास जंग में शिरकत के साधन थे, मगर उन्होंने शिरकत नहीं की। इनके पास सवारी के जानवर और जंगी साज़ो-सामान मौजूद था, जिससे वे जिहाद में शामिल हो सकते थे। यह मालदारी सफ़र वाली और घर से दूर लड़ी जाने वाली जंगों के लिए शर्त है। मगर अगर अपने ही मुल्क में जिहाद ज़रूरी हो जाए, तो यह ग़रीबों पर भी फ़र्ज़ हो जाता है, बशर्ते वे तंदुरुस्त हों और जंगी साज़ो-सामान मौजूद हो — चाहे वह उनका अपना हो या दूसरों से मिला हुआ।
यह आयत साफ़ करती है कि जिहाद औरतों पर फ़र्ज़ नहीं है, सिवाय उस सूरत के जब मैदान-ए-जंग में उनकी ख़ास ज़रूरत हो। उस हालत में उनके लिए शिरकत ज़रूरी हो जाती है। यह उस सूरत-ए-हाल को दिखाता है जब जंग में ख़ास ज़रूरतों की वजह से औरतों को बुलाया जा सकता है, मगर आम तौर पर जिहाद उन पर फ़र्ज़ नहीं है।
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