कुरान - 52:12 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
ٱلَّذِينَ هُمۡ فِي خَوۡضٖ يَلۡعَبُونَ

Transliteration: (Allazeena hum fee khawdiny yal'aboon)

जो बेहूदा बातों (और बातिल बहसों) में खेल रहे हैं [11]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 12

"जो बेहूदा बातों (और बातिल बहसों) में खेल रहे हैं [11]!"


[11] बातिल बहसों और खेल-तमाशे में मसरूफ़ लोग

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'फ़ी ख़ौज़िय्यलअबून' से मुराद बातिल में मुब्तिला लोग हैं:

  • दीन का मज़ाक़ और बातिल बहसें: इससे मुराद वे काफ़िर और मुनकिर हैं जो कुफ़्र, शिर्क और दीनी हक़ाइक़ के ख़िलाफ़ बेहूदा बहसों में अपनी उम्र ज़ाया करते हैं और आख़िरत की फ़िक्र को खेल-तमाशा समझते हैं।
  • ग़फ़लत का सबक़: यह आयत हर मुसलमान को यह दर्स देती है कि जो भी काम, महफ़िल या बातचीत इंसान को अल्लाह की याद, नमाज़ और आख़िरत की तय्यारी से ग़ाफ़िल कर दे, वह महज़ वक़्त की बर्बादी और ख़सारे का सबब है।

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