कुरान - 52:49 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
وَمِنَ ٱلَّيۡلِ فَسَبِّحۡهُ وَإِدۡبَٰرَ ٱلنُّجُومِ

Transliteration: (Wa minal laili fasabbihhu wa idbaaran nujoom)

और रात के कुछ हिस्से में भी उसकी पाकी बयान कीजिए और सितारों के डूबने के बाद भी [60]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 49

"और रात के कुछ हिस्से में भी उसकी पाकी बयान कीजिए और सितारों के डूबने के बाद भी [60]!"


[60] शब-बेदारी, नमाज़-ए-तहज्जुद और सुन्नत-ए-फ़ज्र की अज़मत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत-ए-मुबारका में रात की इबादत की ताकीद है:

  • नमाज़-ए-तहज्जुद: रात के पिछले पहर उठकर अल्लाह के हुज़ूर सजदा-रेज़ होना, नमाज़-ए-तहज्जुद अदा करना और ज़िक्र-ओ-अज़कार करना अल्लाह के मुक़र्रब बंदों का शिआर है। तहज्जुद निहायत आजिज़ी और ख़ामोशी से अदा करनी चाहिए ताकि किसी की नींद में ख़लल न पड़े।
  • शब-ए-मेअराज की यादगार: बुज़ुर्गान-ए-दीन फ़रमाते हैं कि रात की इबादत शब-ए-मेअराज की भी याद दिलाती है, जब अल्लाह तआला ने रात के आख़िरी हिस्से में पोशीदा तौर पर अपने महबूब ﷺ को अपने कुर्ब-ए-ख़ास का शरफ़ बख़्शा।
  • फ़ज्र की सुन्नतें: 'इदबारन नुजूम' (सितारों के डूबने के बाद) से मुराद सुब्ह-ए-सादिक़ के वक़्त फ़ज्र की दो रकअत सुन्नतें हैं, जिन्हें तारीकी में अदा करके इस्तिग़फ़ार और ज़िक्र करना चाहिए, और फिर उजाला होने पर फ़ज्र की फ़र्ज़ नमाज़ अदा की जाए।

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