कुरान - 52:45 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
فَذَرۡهُمۡ حَتَّىٰ يُلَٰقُواْ يَوۡمَهُمُ ٱلَّذِي فِيهِ يُصۡعَقُونَ

Transliteration: (Fazarhum hatta yulaaqoo yawmahumul lazee feehi yus'aqoon)

तो आप उन्हें छोड़ दीजिए यहाँ तक कि वे अपने उस दिन से दो-चार हों जिसमें वे बेहोश होकर गिरेंगे (या हलाक होंगे) [53]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 45

"तो आप उन्हें छोड़ दीजिए यहाँ तक कि वे अपने उस दिन से दो-चार हों जिसमें वे बेहोश होकर गिरेंगे (या हलाक होंगे) [53]!"


[53] क़यामत के हौलनाक दिन का इंतिज़ार

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब काफ़िर किसी तरह नहीं मानते, तो उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाए:

  • सूर फूँके जाने का दिन: 'युसअक़ून' से मुराद वह दिन है जब हज़रत इस्राफ़ील (अलैहिस्सलाम) सूर फूँकेंगे और उसकी भयानक आवाज़ से तमाम मख़लूक़ बेहोश होकर ढेर हो जाएगी और हलाक हो जाएगी।
  • हक़ का इज़हार: उस दिन काफ़िरों की सारी अकड़ ख़ाक में मिल जाएगी और उन्हें मालूम होगा कि नबियों को झुठलाने का क्या भयानक अंजाम होता है।

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