कुरान - 52:1 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
وَٱلطُّورِ

Transliteration: (Wat-Toor)

क़सम है तूर [1] (सीना पहाड़) की! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 1

"क़सम है तूर [1] (सीना पहाड़) की!"


[1] कोह-ए-तूर की अज़मत व तक़द्दुस

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत में अल्लाह तआला ने कोह-ए-तूर की क़सम खाई है:

  • मूसा (अलैहिस्सलाम) से हम-कलामी का मक़ाम: मिस्र और मदाइन के दरमियान वादी-ए-सीना में वाक़े कोह-ए-तूर वह मुक़द्दस पहाड़ है जहाँ हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह तआला से हम-कलामी का शरफ़ हासिल किया।
  • निस्बत की बरकत: कोह-ए-तूर की क़सम खाना इस मक़ाम की अज़मत और तक़द्दुस को ज़ाहिर फ़रमाता है। किसी नबी-ए-बरहक़ की निस्बत से उस मक़ाम को यह ख़ास रिफ़अत और एहतिराम हासिल हुआ।
  • अंबिया व औलिया के मक़ामात का एहतिराम: इससे यह अज़ीम दर्स मिलता है कि अल्लाह के नबियों और औलिया से मंसूब मक़ामात, यादगारें और अशिया बरकत और इज़्ज़त वाली बन जाती हैं।

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