कुरान - 52:2 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
وَكِتَٰبٖ مَّسۡطُورٖ

Transliteration: (Wa kitaabim mastoor)

और लिखी हुई किताब [2] की! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 2

"और लिखी हुई किताब [2] की!"


[2] लिखी हुई मुक़द्दस किताबों व तहरीरों की शान

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने लिखी हुई किताब की क़सम खाई, जो ऐसी तहरीरों की अहमियत को बयान फ़रमाती है जो बारगाह-ए-इलाही में महबूब हैं:

  • मुक़द्दस तहरीरों की किस्में: इससे मुराद कई मुक़द्दस तहरीरें हो सकती हैं:
    • उलमा-ए-किराम और फ़ुक़हा के वे फ़तावा जो शरीअत की रहनुमाई करते हैं।
    • हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की नात, मदह और मनाक़िब में लिखी गई नज़्में और क़सीदे।
    • क़ुरआन मजीद और अहादीस-ए-मुबारका के मुतसन्नफ़ात, नुस्ख़े और उनकी तफ़ासीर।
    • फ़रिश्तों के ज़रिए लिखे जाने वाले इंसानों के नाम-ए-आमाल और लौह-ए-महफ़ूज़ की तक़दीरी तहरीरें।
    • साबिक़ा आसमानी किताबें जैसे तौरात, इंजील, ज़बूर और दीगर सहीफ़े।
  • क़लम और तहरीर की अज़मत: यह आयत लिखने की अज़मत और उन तहरीरों की क़द्र-ओ-मंजि़लत को उजागर करती है जो दीनी और रूहानी अहकाम को महफ़ूज़ रखती हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now