Transliteration: (Fee raqqim manshoor)
"जो खुले हुए वरक़ (जिल्द) में लिखी है!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'रक़्क़िम मंशूर' से मुराद वह खुला हुआ और फैला हुआ वरक़ या जिल्द है जिस पर अल्लाह के अहकाम और आसमानी कलाम वाज़ेह तौर पर लिखे गए हैं:
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