कुरान - 52:3 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
فِي رَقّٖ مَّنشُورٖ

Transliteration: (Fee raqqim manshoor)

जो खुले हुए वरक़ (जिल्द) में लिखी है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 3

"जो खुले हुए वरक़ (जिल्द) में लिखी है!"


खुले हुए और रौशन सहीफ़े

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'रक़्क़िम मंशूर' से मुराद वह खुला हुआ और फैला हुआ वरक़ या जिल्द है जिस पर अल्लाह के अहकाम और आसमानी कलाम वाज़ेह तौर पर लिखे गए हैं:

  • वाज़ेह और रौशन कलाम: अल्लाह का कलाम कोई पोशीदा या उलझा हुआ मुअम्मा नहीं है, बल्कि खुले हुए सहीफ़ों की तरह रौशन और हिदायत से भरपूर है ताकि हर पढ़ने और समझने वाला उससे फ़ैज़याब हो सके।
  • आसमानी सहीफ़ों की हिफ़ाज़त: यह इस बात की तरफ़ भी इशारा है कि रब्बानी अहकाम खुले तौर पर महफ़ूज़ हैं और उनमें किसी तरह की तब्दीली या तहरीफ़ की गुंजाइश नहीं।

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