कुरान - 52:7 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَٰقِعٞ

Transliteration: (Inna 'azaaba Rabbika lawaaqi')

बेशक तुम्हारे रब का अज़ाब [6] यक़ीनन वाक़े होने वाला है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 7

"बेशक तुम्हारे रब का अज़ाब [6] यक़ीनन वाक़े होने वाला है!"


[6] रब के क़तई अज़ाब की हक़ीक़त

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ऊपर की अज़ीम क़समों के बाद यह असल बात बयान फ़रमाई गई है:

  • अज़ाब-ए-क़ब्र या अज़ाब-ए-हश्र: इससे मुराद या तो क़ब्र का अज़ाब है या क़यामत के दिन का अज़ाब।
  • क़यामत का अज़ाब: अगली आयतों के सियाक़ व सबाक़ से वाज़ेह तौर पर क़यामत और दोज़ख़ का अज़ाब मुराद है, जिसमें मुनकिरीन और काफ़िरों को हमेशा के लिए गिरफ़्तार किया जाएगा।
  • यक़ीनी और अटल हक़ीक़त: अल्लाह तआला का यह फ़रमान साबित करता है कि आख़िरत और जज़ा व सज़ा कोई ख़्याली बात नहीं, बल्कि एक अटल और यक़ीनी हक़ीक़त है जो हर हाल में सामने आकर रहेगी।

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