कुरान - 52:8 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
مَّا لَهُۥ مِن دَافِعٖ

Transliteration: (Maa lahoo min daafi')

उसे कोई टालने वाला [7] नहीं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 8

"उसे कोई टालने वाला [7] नहीं!"


[7] तक़दीर-ए-मुबरम और अज़ाब का ना-क़ाबिले-टाल होना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब अज़ाब का वक़्त आ जाएगा तो कायनात की कोई ताक़त उसे रोक नहीं सकती:

  • तक़दीर-ए-मुबरम: यह आयत ज़ाहिर फ़रमाती है कि अल्लाह तआला का जो फ़ैसला तक़दीर-ए-मुबरम (अटल तक़दीर) के तहत नाफ़िज़ हो चुका हो, उसे न कोई टाल सकता है और न बदल सकता है।
  • क़ुरआनी सनद: जैसा कि सूरह क़ाफ़ (50:29) में इरशाद हुआ: "मेरे यहाँ बात बदली नहीं जाती और न मैं बंदों पर ज़ुल्म करने वाला हूँ"।
  • काफ़िरों की बेबसी: दुनिया में जालिम और मुनकिर अपनी दौलत, फ़ौज या तदबीरों से बचते रहे हों, मगर बारगाह-ए-इलाही के क़हर और अज़ाब के आगे सब बेबस और लाचार साबित होंगे।

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