कुरान - 52:10 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
وَتَسِيرُ ٱلۡجِبَالُ سَيۡرٗا

Transliteration: (Wa taseerul jibaalu sairaa)

और पहाड़ निहायत तेज़ रफ़्तार से चलने लगेंगे [9]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 10

"और पहाड़ निहायत तेज़ रफ़्तार से चलने लगेंगे [9]!"


[9] पहाड़ों का उड़ना और रेज़ा-रेज़ा होना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत के दिन ज़मीन के भारी-भरकम पहाड़ अपनी जगहों से उखड़ जाएँगे:

  • पहाड़ों के मुख़्तलिफ़ मराहिल: क़यामत के दिन पहाड़ों पर कई हालतें गुज़रेंगी:
    • पहले वे ज़मीन से उखड़कर बादलों की तरह हवा में तैरने लगेंगे।
    • फिर वे धुनी हुई रंग-बिरंगी रुई की तरह उड़ेंगे।
    • और आखिरकार वे बारीक रेत और ग़ुबार बनकर हवा में उड़ जाएँगे और ज़मीन बिल्कुल चटियल मैदान बन जाएगी।
  • हौलनाक मंज़र: यह इस बात की दलील है कि जब पहाड़ों जैसी अज़ीम और सख़्त मख़लूक़ का यह हाल होगा, तो इंसान की बेबसी का क्या आलम होगा!

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