कुरान - 52:11 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
فَوَيۡلٞ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُكَذِّبِينَ

Transliteration: (Fawailuny yawma 'izil lil mukaazzibeen)

तो उस दिन झुठलाने वालों [10] के लिए बड़ी ख़राबी (हलाकत) है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 11

"तो उस दिन झुठलाने वालों [10] के लिए बड़ी ख़राबी (हलाकत) है!"


[10] झुठलाने वालों का अंजाम और तीन अहम मसाइल

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'झुठलाने वालों' से मुराद वे लोग हैं जिन्होंने नबियों की रिसालत और अल्लाह के कलाम का इंकार किया। इस आयत-ए-मुबारका से तीन निहायत अहम दीनी मसाइल साबित होते हैं:

  1. अहले-फ़तरत की नजात: जिन लोगों तक किसी नबी की दावत और शरीअत नहीं पहुँची (जैसे ज़माना-ए-फ़तरत के लोग और हुज़ूर अकरम ﷺ के वालिदैन करीमैन हज़रत अब्दुल्लाह व हज़रत आमिना रज़ियल्लाहु अन्हुमा), वे अज़ाब से महफ़ूज़ और तौहीद के सबब नजात पाने वाले हैं, क्योंकि अज़ाब रसूलों को झुठलाने वालों पर है।
  2. मुशरिकीन के नाबालिग़ बच्चे: काफ़िरों और मुशरिकों के वे बच्चे जो नबालिग़ी की उम्र में फ़ौत हो गए, उन्हें जहन्नम का अज़ाब नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने ख़ुद होश सँभाल कर रसूलों को नहीं झुठलाया।
  3. गुनाहगार मोमिनीन का अंजाम: गुनाहगार अहले-ईमान को अगर उनके गुनाहों की सज़ा मिली भी, तो वह हमेशा के लिए नहीं होगी और न ही उनके साथ झुठलाने वाले काफ़िरों जैसा ज़िल्लत-आमेज़ सुलूक होगा। वे आख़िरकार हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत और अल्लाह की रहमत से जन्नत में दाख़िल किए जाएँगे।

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