कुरान - 52:4 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَٱلۡبَيۡتِ ٱلۡمَعۡمُورِ

Transliteration: (Wal baitil ma'moor)

और आबाद घर (बैत-उल-मामूर) [3] की! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 4

"और आबाद घर (बैत-उल-मामूर) [3] की!"


[3] बैत-उल-मामूर और आबाद मक़ामात का बयान

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'बैत-उल-मामूर' (आबाद घर) की कई मुबारक़ तौजीहात हैं:

  • ख़ाना-ए-काबा (मक्का मुकर्रमा): वह मुक़द्दस घर जो हर वक़्त तवाफ़ करने वालों, नमाज़ियों, हाजियों और मोअतकिफ़ीन से आबाद रहता है। दुनिया का सबसे ज़्यादा ज़ियारत किया जाने वाला और मुक़द्दस मक़ाम काबा शरीफ़ ही है।
  • आसमानी बैत-उल-मामूर: सातवें आसमान पर अर्श के नीचे स्थित वह मुक़द्दस मक़ाम जो फ़रिश्तों का क़िबला है। हदीस शरीफ़ के मुताबिक़ वहाँ रोज़ाना सत्तर हज़ार फ़रिश्ते इबादत के लिए दाख़िल होते हैं, और क़यामत तक दोबारा उनकी बारी नहीं आती। हुज़ूर ﷺ ने शब-ए-मेअराज इसकी ज़ियारत फ़रमाई।
  • औलिया व मोमिनीन के दिल: अल्लाह के नेक बंदों के वे दिल जो हर लम्हा ज़िक्र-ए-इलाही और मारिफ़त से आबाद व मामूर रहते हैं।
  • अहले-ईमान के घराने: वे घर जहाँ नमाज़, तिलावत-ए-क़ुरआन और दुरूद व सलाम की महफ़िलें सजती हैं, वे भी अल्लाह की रहमत से आबाद घर हैं।

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