कुरान - 52:44 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
وَإِن يَرَوۡاْ كِسۡفٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ سَاقِطٗا يَقُولُواْ سَحَابٞ مَّرۡكُومٞ

Transliteration: (Wa iny yaraw kisfam minas samaaa'i saaqitany yaqooloo sahaabum markoom)

और अगर वे आसमान का कोई टुकड़ा गिरता हुआ देखें, तो कहेंगे: "यह तो तह-बर-तह जमा हुआ बादल है" [52]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 44

"और अगर वे आसमान का कोई टुकड़ा गिरता हुआ देखें, तो कहेंगे: 'यह तो तह-बर-तह जमा हुआ बादल है' [52]!"


[52] हक़ से इंकार और मुनकिरीन की हठधर्मी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िरों की अंध-श्रद्धा और हठधर्मी इस हद तक पहुँच चुकी थी:

  • आसमानी अज़ाब को झुठलाना: अगर उनकी आँखों के सामने आसमान का टुकड़ा अज़ाब बनकर गिरने लगे, तब भी वे ईमान नहीं लाएँगे, बल्कि अपनी जिहालत में कहेंगे कि यह तो महज़ गहरा बादल है जो बारिश बरसाने आया है।
  • सबक़: जब दिल पर कुफ़्र की स्याही छा जाए, तो बड़ी से बड़ी निशानी भी इंसान को हिदायत नहीं दे सकती।

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