कुरान - 52:46 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
يَوۡمَ لَا يُغۡنِي عَنۡهُمۡ كَيۡدُهُمۡ شَيۡـٔٗا وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ

Transliteration: (Yawma laa yughnee 'anhum kaiduhum shai'anw wa laa hum yunsaroon)

जिस दिन न उनका कोई फ़रेब उनके कुछ काम आएगा और न उन्हें कोई मदद दी जाएगी [54]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 46

"जिस दिन न उनका कोई फ़रेब उनके कुछ काम आएगा और न उन्हें कोई मदद दी जाएगी [54]!"


[54] फ़रेब की बे-असरी और मदद से महरूमी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत के दिन काफ़िर बिल्कुल बे-यारो मददगार होंगे:

  • चालबाज़ियों का ख़ात्मा: दुनिया में काफ़िर अपनी मक्कारियों, झूठे बयानों और साज़िशों से काम निकालते थे, मगर उस दिन उनकी कोई चाल काम नहीं आएगी।
  • मददगार से महरूमी: अहले-ईमान की मदद तो फ़रिश्ते, अंबिया और औलिया करेंगे, मगर काफ़िरों को कोई मदद नसीब नहीं होगी; न मौत के वक़्त, न क़ब्र में और न ही हश्र के मैदान में।

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