कुरान - 52:43 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
أَمۡ لَهُمۡ إِلَٰهٌ غَيۡرُ ٱللَّهِۚ سُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يُشۡرِكُونَ

Transliteration: (Am lahum ilaahun ghairul laa; subhaanal laahi 'ammaa yushrikoon)

या अल्लाह के सिवा उनका कोई और माबूद है? अल्लाह पाक है [51] उन चीज़ों से जिन्हें वे उसका शरीक ठहराते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 43

"या अल्लाह के सिवा उनका कोई और माबूद है? अल्लाह पाक है [51] उन चीज़ों से जिन्हें वे उसका शरीक ठहराते हैं!"


[51] अल्लाह तआला की पाकीज़गी और महबूब ﷺ की हिफ़ाज़त

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत तौहीद की बुलंदी को ज़ाहिर करती है:

  • शिर्क से पाकी: अल्लाह तआला तमाम झूठे माबूदों, बुतों और शिर्किया अक़ीदों से पाक और बे-नियाज़ है। इबादत और कु़दरत सिर्फ़ उसी के लिए ख़ास है।
  • अल्लाह के महबूब की पनाह: जो लोग हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की पनाह और दामन में आ जाते हैं, वे तमाम आफ़तों और अज़ाबों से महफ़ूज़ हो जाते हैं। जिस तरह पट्टा पड़ा हुआ कुत्ता अपने मालिक का समझा जाता है और कोई उस पर हाथ नहीं डालता, उसी तरह जो हुज़ूर ﷺ की ग़ुलामी का पट्टा अपने गले में डाल ले, वह दोज़ख़ की आग से महफ़ूज़ हो जाता है।

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