कुरान - 52:47 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ عَذَابٗا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa inna lillazeena zalamoo 'azaaban doona zalika wa laakinna aksarahum laa ya'lamoon)

और बेशक ज़ालिमों के लिए उससे पहले भी एक अज़ाब [55] है, लेकिन उनमें से अक्सर लोग नहीं जानते [56]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 47

"और बेशक ज़ालिमों के लिए उससे पहले भी एक अज़ाब [55] है, लेकिन उनमें से अक्सर लोग नहीं जानते [56]!"


[55] क़यामत से पहले अज़ाब-ए-क़ब्र और दुनियावी सज़ा

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'दूना ज़ालिक' से मुराद क़यामत के बड़े अज़ाब से पहले का अज़ाब है:

  • अज़ाब-ए-क़ब्र का क़ुरआनी सुबूत: इस आयत से वाज़ेह तौर पर अज़ाब-ए-क़ब्र साबित होता है। मरने के बाद और हश्र से पहले क़ब्र व बरज़ख़ में काफ़िरों को अज़ाब दिया जाता है।
  • दुनियावी अज़ाब: या इससे मुराद वह सात साला क़हत व अकाल और बदर की तलवार का अज़ाब है जो क़यामत से पहले दुनिया में मक्का के मुशरिकीन पर नाज़िल हुआ।

[56] अज़ाब से बे-ख़बरी और ग़फ़लत का आलम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िर इस आने वाले अज़ाब से बिल्कुल ग़ाफ़िल हैं:

  • ज़िब्ह होने वाले जानवरों की मिसाल: जिस तरह बकरा क़साई के हाथ में चारा चरते हुए इस बात से बे-ख़बर होता है कि कुछ देर बाद उसकी गर्दन पर छुरी चलने वाली है, उसी तरह ये काफ़िर दुनिया की रंगीनियों में मस्त होकर अपने आने वाले अज़ाब से बे-ख़बर हैं।

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