कुरान - 52:15 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
أَفَسِحۡرٌ هَٰذَآ أَمۡ أَنتُمۡ لَا تُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Afasihrun haazaaaa am antum laa tubsiroon)

"तो क्या यह कोई जादू [13] है, या तुम्हें दिखाई नहीं देता?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 15

"तो क्या यह कोई जादू [13] है, या तुम्हें दिखाई नहीं देता?"


[13] जादू का इल्ज़ाम और हक़ीक़त का इज़हार

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत काफ़िरों के बातिल दावों का जवाब देती है:

  • दुनियावी बोहतान का जवाब: दुनिया में जब हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ वाज़ेह मोजि़ज़ात (जैसे शक्कुल क़मर वगैरह) दिखाते थे, तो काफ़िर अपनी हठधर्मी की वजह से कहते थे कि यह तो खुला जादू है या हमारी आँखों पर पर्दा डाल दिया गया है।
  • क़यामत में तंज़िया सवाल: अब दोज़ख़ की दहकती हुई आग में उनसे तंज़िया पूछा जाएगा कि क्या यह आग भी तुम्हारी नज़रों का धोखा और जादू है, या अब तुम्हारी आँखें इस अज़ाब को साफ़ देख रही हैं?
  • हक़ की जीत: बातिल हमेशा के लिए ज़लील हो जाएगा और हक़ अपनी पूरी शान व शौकत के साथ रौशन रहेगा।

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