कुरान - 52:17 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّـٰتٖ وَنَعِيمٖ

Transliteration: (Innal muttaqeena fee jannaatinw wa na'eem)

बेशक परहेज़गार लोग जन्नतों और नेअमतों में [16] होंगे! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 17

"बेशक परहेज़गार लोग जन्नतों और नेअमतों में [16] होंगे!"


[16] परहेज़गारों का मक़ाम और गुनाहगार मोमिनीन की नजात

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि दोज़ख़ियों के ज़िक्र के बाद मुत्तक़ीन (परहेज़गारों) का हाल बयान फ़रमाया जा रहा है:

  • मुत्तक़ीन का मक़ाम: वे लोग जो दुनिया में शिर्क, कुफ़्र और बातिल अक़ीदों से बचे रहे और जिन्होंने नेक आमाल किए, वे जन्नत के सदाबहार बाग़ों और बेमिसाल नेअमतों में शादमान रहेंगे।
  • मोमिनीन की नजात: अगर किसी मोमिन से अमली कोताही या गुनाह भी हुआ हो, लेकिन उसका अक़ीदा दुरुस्त रहा, तो वह भी अपने ईमान की बरकत से आख़िरकार जन्नत में दाख़िल होगा—चाहे वह हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत से बख़्शा जाए या आरज़ी सज़ा भुगत कर पाक साफ़ होकर जन्नत में पहुँचे।
  • क़ुरआन व हदीस का पैग़ाम: यह आयत और अहादीस-ए-मुबारका साफ़ गवाही देती हैं कि ईमान की दौलत कभी ज़ाया नहीं होती और अहले-ईमान का आख़िरी ठिकाना जन्नत ही है।

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