कुरान - 52:19 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ هَنِيٓـَٔۢا بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Kuloo washraboo haneee 'am bimaa kuntum ta'maloon)

(उनसे कहा जाएगा:) "मज़े से खाओ और पियो [19], उन नेक आमाल के बदले [20] जो तुम किया करते थे!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 19

"(उनसे कहा जाएगा:) 'मज़े से खाओ और पियो [19], उन नेक आमाल के बदले [20] जो तुम किया करते थे!'"


[19] जन्नत की पाक और बे-रोकटोक नेअमतें

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'हनी-अम' (मज़े से) का लफ़्ज़ जन्नत की ग़िज़ा की ख़ासियत को बयान करता है:

  • न कोई तकलीफ़, न कोई बीमारी: दुनिया का खाना-पीना बीमारी, बदहज़मी या गंदगी का बाइस बन सकता है, मगर जन्नत का खाना-पीना निहायत पाक, लज़ीज़ और राहत-बख़्श होगा, जिसमें कोई बीमारी या गिलाज़त नहीं होगी।
  • मुकम्मल आज़ादी: दुनिया में शरीअत की जिन पाबंदियों (रोज़ा, हराम से परहेज़) को मोमिनों ने बरता, जन्नत में वही पाबंदियाँ हमेशा की राहत और बे-रोकटोक लज़्ज़त में बदल जाएँगी।

[20] नेक आमाल और औलाद के सबब जज़ा

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह अज़ीम नेअमतें मोमिनीन के नेक आमाल का सिला हैं:

  • आमाल का अज्र: अल्लाह तआला अपने बंदों की नमाज़, रोज़ा, सदक़ा और इबादत के बदले यह दरजात अता फ़रमाता है।
  • मोमिनीन के बच्चों का मक़ाम: मोमिनीन के वे बच्चे जो बचपन में दुनिया से चले गए, वे भी अपने वालिदैन के ईमान और नेक तरबियत के ताबे होकर इसी अज्र व जज़ा के हक़दार बनते हैं।

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