कुरान - 52:20 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ سُرُرٖ مَّصۡفُوفَةٖۖ وَزَوَّجۡنَٰهُم بِحُورٍ عِينٖ

Transliteration: (Muttaki'eena 'alaa sururim masfoofatinw wa zawwaj naahum bihoorin 'een)

वे क़तार दर क़तार लगे हुए तख़्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे [21], और हम बड़ी-बड़ी ख़ूबसूरत आँखों वाली हूरों से उनका निकाह कर देंगे [22]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 20

"वे क़तार दर क़तार लगे हुए तख़्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे [21], और हम बड़ी-बड़ी ख़ूबसूरत आँखों वाली हूरों से उनका निकाह कर देंगे [22]।"


[21] जन्नत में सुकून व राहत और आराम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'मत्तकिईना अला सुरुरिम मसफ़ूफ़ह' से मुराद शाही ठाठ-बाट है:

  • मेहनत व मशक़्क़त का ख़ात्मा: दुनिया दारुल-अमल (मेहनत की जगह) थी, जबकि जन्नत दारुल-जज़ा और राहत का मक़ाम है। वहाँ अहले-ईमान को किसी काम, थकावट या मशक़्क़त का सामना नहीं करना पड़ेगा।
  • शाही तख़्त और क़तारें: जन्नती मोमिनीन सोने-चाँदी और ज़वाहिरात से जड़े हुए तख़्तों पर तकिया लगाए निहायत शान व शौकत और सुकून के साथ बैठेंगे।
  • दीदार-ए-इलाही और मसरूरियत: यह मजलिसें बे-फ़िक्री, उल्फ़त और दीदार-ए-इलाही के नूर से हमेशा रौशन रहेंगी।

[22] हूरों के साथ विसाल और पाकीज़ा रफ़ाक़त

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'हूरिन ईन' से मुराद जन्नत की पाक-साफ़ और असीम हुस्न वाली बीवियाँ हैं:

  • हूरों का हुस्न व पाकीज़गी: हूरें हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की औलाद से नहीं हैं, बल्कि वे अल्लाह तआला की ख़ास जन्नती मख़लूक़ हैं, जिनकी आँखें बड़ी-बड़ी, ख़ूबसूरत और ग़ज़ब की पुरकशिश होंगी।
  • पाकीज़ा निकाह: अल्लाह तआला अहले-जन्नत का निकाह इन मुक़द्दस हूरों से फ़रमाएगा, जो हर तरह की दुनियावी नापाकियों और ऐबों से पाक होंगी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now