कुरान - 52:27 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
فَمَنَّ ٱللَّهُ عَلَيۡنَا وَوَقَىٰنَا عَذَابَ ٱلسَّمُومِ

Transliteration: (Famannnal laahu 'alainaa wa waqaanaa 'azaabas samoom)

"तो अल्लाह ने हम पर बड़ा एहसान फ़रमाया और हमें लूह (सूमूम) की गर्म हवा के अज़ाब से बचा लिया [32]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 27

"तो अल्लाह ने हम पर बड़ा एहसान फ़रमाया और हमें लूह (सूमूम) की गर्म हवा के अज़ाब से बचा लिया [32]!"


[32] अल्लाह तआला का अज़ीम एहसान और रहमत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अहले-जन्नत अल्लाह के फ़ज़्ल का एअतिराफ़ करेंगे:

  • नेकी की तौफ़ीक़ रब का फ़ज़्ल है: इंसान को नेक आमाल करने की तौफ़ीक़ मिलना और उन पर क़ायम रहना यह सब अल्लाह की ख़ास रहमत और एहसान से होता है।
  • अज़ाब-ए-सूमूम से नजात: 'सूमूम' जहन्नम की वह भयानक ज़हरीली और झुलसा देने वाली लपट है जो हड्डियों तक को पिघला दे। अल्लाह तआला ने अपने फ़ज़्ल से मोमिनों को इस दर्दनाक अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा लिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now