कुरान - 52:28 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
إِنَّا كُنَّا مِن قَبۡلُ نَدۡعُوهُۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡبَرُّ ٱلرَّحِيمُ

Transliteration: (Innaa kunnaa min qablu nad'oohu innahoo huwal barrur raheem)

"बेशक हम इससे पहले सिर्फ़ उसी की इबादत करते थे; बेशक वही बड़ा एहसान फ़रमाने वाला, निहायत रहम वाला है [33]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 28

"बेशक हम इससे पहले सिर्फ़ उसी की इबादत करते थे; बेशक वही बड़ा एहसान फ़रमाने वाला, निहायत रहम वाला है [33]!"


[33] इबादत में आजिज़ी और शुक्रगुज़ारी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नती अपनी इबादत का नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत का तज़किरा करेंगे:

  • इबादत पर नाज़ न करना: इंसान को अपनी इबादतों और नमाज़ों पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि यह समझना चाहिए कि उसी मेहरबान रब ने इबादत की तौफ़ीक़ दी और उसी ने क़बूल फ़रमाकर जन्नत अता की।
  • अल-बर्रु अर-रहीम: अल्लाह तआला बड़ा एहसान करने वाला और निहायत मेहरबान है, जो बंदे के मामूली आमाल पर भी असीम जज़ा और रहमतें अता फ़रमाता है।

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