कुरान - 52:30 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
أَمۡ يَقُولُونَ شَاعِرٞ نَّتَرَبَّصُ بِهِۦ رَيۡبَ ٱلۡمَنُونِ

Transliteration: (Am yaqooloona shaa'irun natarabbasu bihee raibal manoon)

या वे कहते हैं: "यह कोई शायर हैं [36], जिनके लिए हम ज़माने के गर्दिश व हवादिस का इंतिज़ार कर रहे हैं [37]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 30

"या वे कहते हैं: 'यह कोई शायर हैं [36], जिनके लिए हम ज़माने के गर्दिश व हवादिस का इंतिज़ार कर रहे हैं [37]!'"


[36] शायर के इल्ज़ाम का रद्द और नबी ﷺ की अज़ीम शान

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िरों का हुज़ूर ﷺ को शायर कहना सरासर बोहतान था:

  • क़ुरआन शायरी नहीं: शायरी ख़्याली और वज़नी बातों का नाम है जो सच और झूठ का मुरक्कब होती है, जबकि क़ुरआन हक़ीक़त और वह्य-ए-इलाही है।
  • क़ुरआनी सनद: अल्लाह तआला ने सूरह यासीन (36:69) में फ़रमाया: "और हमने उन्हें (नबी को) शेर कहना नहीं सिखाया और न यह उनकी शान के शायान है"। हुज़ूर ﷺ ने कभी कोई शेर नहीं कहा, आपका कलाम रब्बानी वह्य है।

[37] ज़माने की गर्दिश का झूठा इंतिज़ार और नबी ﷺ का दवाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िर कहते थे कि जैसे पुराने शायर मर गए और उनका नाम मिट गया, वैसे ही मुआज़ल्लाह हुज़ूर ﷺ का नाम भी ख़त्म हो जाएगा:

  • सूरज की तरह रौशन नाम: काफ़िरों की यह तमन्ना ख़ाक में मिल गई। हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ वह हक़ीक़ी आफ़्ताब हैं जिसकी किरनों से दोनों जहाँ रौशन हैं।
  • अबदी ज़िंदगानी: हुज़ूर ﷺ का नाम-ए-मुबारक और आपका दीन क़यामत तक बल्कि हमेशा के लिए ज़िंदा व तबांदा है। आपके ग़ुलाम जैसे हज़रत ग़ौस-ए-आज़म और हज़रत इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) का नाम आज भी ज़िंदा है, तो ख़ुद आक़ा-ए-दो जहाँ ﷺ की शान का क्या पूछना!

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