कुरान - 52:32 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
أَمۡ تَأۡمُرُهُمۡ أَحۡلَٰمُهُم بِهَٰذَآۚ أَمۡ هُمۡ قَوۡمٞ طَاغُونَ

Transliteration: (Am taamuruhum ahlaamuhum bihaazaaa am hum qawmun taaghoon)

क्या उनकी अक़्लें उन्हें इस बात का हुक्म देती हैं, या वे सरकश व हठधर्म लोग हैं [39]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 32

"क्या उनकी अक़्लें उन्हें इस बात का हुक्म देती हैं, या वे सरकश व हठधर्म लोग हैं [39]?"


[39] हक़ के ख़िलाफ़ सरकशी और बेतुकी बातें

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत में हुज़ूर ﷺ को तसल्ली दी जा रही है:

  • मुनकिरीन का तज़ाद: काफ़िरों की बातों में कोई अक़्ल या दलील नहीं थी। वे कभी हुज़ूर ﷺ को (मुआज़ल्लाह) शायर कहते, कभी काहिन और कभी मजनूँ। अगर उनमें अक़्ल होती तो वे अपनी ही बातों के इस खुले तज़ाद को समझते।
  • सरकशी व जिहालत: यह सब उनकी हठधर्मी और सरकशी थी। अल्लाह तआला ने अपने महबूब ﷺ से फ़रमाया कि इन नादानों की बेहूदा बातों से आप रंजीदा न हों, क्योंकि बे-अक़्लों की बातों पर तवज्जोह नहीं दी जाती।

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