कुरान - 52:34 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
فَلۡيَأۡتُواْ بِحَدِيثٖ مِّثۡلِهِۦٓ إِن كَانُواْ صَٰدِقِينَ

Transliteration: (Falyaatoo bihadeesim misliheee in kaanoo saadiqeen)

तो चाहिए कि वे इस जैसी कोई एक बात (कलाम) ले आएँ, अगर वे सच्चे हैं [40]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 34

"तो चाहिए कि वे इस जैसी कोई एक बात (कलाम) ले आएँ, अगर वे सच्चे हैं [40]!"


[40] क़ुरआन जैसी मिसाल लाने का खुला चैलेंज

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने मुनकिरीन को खुला चैलेंज दिया:

  • बेमिसाल कलाम: अगर तुम्हारा यह ख़्याल है कि यह किसी इंसान का बनाया हुआ कलाम है, तो तुम भी तो अरबी ज़बान के माहिर हो, इस क़ुरआन जैसी कोई एक सूरत या बात ही बनाकर दिखा दो।
  • इंसानी ताक़त से बाहर: जिस तरह इंसान चाँद, सूरज, चींटी या जुगनू नहीं बना सकता, उसी तरह क़ुरआन-ए-पाक जैसी एक आयत भी बनाना तमाम इंसानों और जिन्नों के बस से बाहर है। यह खुला मोजि़ज़ा क़ियामत तक क़ुरआन की हक़्क़ानियत का सुबूत है।

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