कुरान - 52:35 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
أَمۡ خُلِقُواْ مِنۡ غَيۡرِ شَيۡءٍ أَمۡ هُمُ ٱلۡخَٰلِقُونَ

Transliteration: (Am khuliqoo min ghairi shai'in am humul khaaliqoon)

क्या वे किसी चीज़ के बग़ैर ख़ुद-ब-ख़ुद पैदा हो गए हैं, या वे ख़ुद ही पैदा करने वाले (ख़ालिक़) हैं [41]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 35

"क्या वे किसी चीज़ के बग़ैर ख़ुद-ब-ख़ुद पैदा हो गए हैं, या वे ख़ुद ही पैदा करने वाले (ख़ालिक़) हैं [41]?"


[41] तख़लीक़ और ख़ालिक़ की मारिफ़त का सवाल

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत तौहीद की निहायत लतीफ़ और क़तई दलील है:

  • अक़्ली दलील: इंसान या तो बिना किसी बनाने वाले के ख़ुद बन गया हो, या उसने ख़ुद अपने आप को बनाया हो। ये दोनों बातें अक़्लन नामुमकिन हैं। कोई भी चीज़ बग़ैर ख़ालिक़ के वजूद में नहीं आ सकती।
  • इबादत का हक़दार ख़ालिक़ ही है: जब यह साबित हो गया कि इंसान का एक ख़ालिक़ और परवरदिगार है, तो फिर उसी वहदहू ला शरीक रब की इबादत करना हर इंसान पर लाज़िम है।

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