कुरान - 52:36 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
أَمۡ خَلَقُواْ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ

Transliteration: (Am khalaqus samaawaati wal ard; bal laa yooqinoon)

या उन्होंने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया है [42]? बल्कि उन्हें (अल्लाह की तौहीद पर) यक़ीन ही नहीं है [43]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 36

"या उन्होंने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया है [42]? बल्कि उन्हें (अल्लाह की तौहीद पर) यक़ीन ही नहीं है [43]!"


[42] ज़मीन व आसमान की तख़लीक़ और इबादत का हक़दार

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने उनसे दूसरा सवाल फ़रमाया:

  • कायनात का ख़ालिक़ कौन: अगर तुम अपनी तख़लीक़ के मुन्किर हो, तो क्या तुमने इस अज़ीम आसमान और ज़मीन को बनाया है? हरगिज़ नहीं! जब तुम कायनात के ख़ालिक़ नहीं बल्कि ख़ुद मख़लूक़ हो, तो फिर ख़ालिक़-ए-कायनात के सामने झुकने से क्यों कतराते हो?

[43] ज़बानी एअतिराफ़ मगर बुतपरस्ती का तज़ाद

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िर ज़बान से तो मानते थे कि ज़मीन व आसमान का ख़ालिक़ अल्लाह है, मगर अमल से शिर्क करते थे:

  • यक़ीन का फ़क़्दान: उनके पास ईमान और यक़ीन की दौलत नहीं थी। जब ख़ालिक़ अल्लाह है तो फिर पत्थरों और बुतों की पूजा करना सरासर गुमराही और अक़्ल का दिवालियापन है।

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