कुरान - 52:38 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
أَمۡ لَهُمۡ سُلَّمٞ يَسۡتَمِعُونَ فِيهِۖ فَلۡيَأۡتِ مُسۡتَمِعُهُم بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٍ

Transliteration: (Am lahum sullamuny yastami'oona feehi falyaati mustami'uhum bisultaanim mubeen)

या उनके पास कोई सीढ़ी [45] है जिस पर चढ़कर वे (आसमानी बातें) सुनते हैं? तो उनके सुनने वाले को चाहिए कि कोई रौशन सनद पेश करे! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 38

"या उनके पास कोई सीढ़ी [45] है जिस पर चढ़कर वे (आसमानी बातें) सुनते हैं? तो उनके सुनने वाले को चाहिए कि कोई रौशन सनद पेश करे!"


[45] ग़ैबी बातों तक रसाई की नामुमकिनत और वह्य की हक़्क़ानियत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने उनके झूठे दावों को बे-नक़ाब फ़रमाया:

  • आसमानी इल्म का दावा झूठा: क्या काफ़िरों के पास कोई ऐसी सीढ़ी है जिस पर चढ़कर वे आसमान पर फ़रिश्तों की गुफ़्तगू सुन आते हैं कि नबुव्वत और दीन के बारे में उनके दावे सच हैं?
  • सनद और दलील की माँग: अगर उनके पास ऐसा कोई ज़रिया है तो वे कोई वाज़ेह सनद और खुली दलील पेश करें। हक़ीक़त यह है कि उनके पास कोई दलील नहीं, जबकि हमारे नबी ﷺ के पास अल्लाह की सच्ची वह्य और मोजि़ज़ात की रौशन दलीलें मौजूद हैं।

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