कुरान - 52:39 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
أَمۡ لَهُ ٱلۡبَنَٰتُ وَلَكُمُ ٱلۡبَنُونَ

Transliteration: (Am lahul banaatu wa lakumul banoon)

क्या अल्लाह के लिए तो बेटियाँ हैं और तुम्हारे लिए बेटे [46]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 39

"क्या अल्लाह के लिए तो बेटियाँ हैं और तुम्हारे लिए बेटे [46]?"


[46] मुशरिकीन के बातिल अक़ीदों का रद्द

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत मुशरिकों के शर्मनाक अक़ीदे की पोल खोलती है:

  • फ़रिश्तों को बेटियाँ कहना: मुशरिकीन-ए-अरब का यह बातिल अक़ीदा था कि फ़रिश्ते (मुआज़ल्लाह) अल्लाह की बेटियाँ हैं।
  • उनका अपना दोहरा मेयार: दूसरी तरफ़ वे ख़ुद बेटियों की पैदाइश को ज़िल्लत समझते थे और बच्चियों को ज़िंदा दफ़न कर देते थे। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि जिसे तुम अपने लिए ऐब समझते हो, उसे अल्लाह की तरफ़ मंसूब करते हो? अल्लाह तआला औलाद, बीवी और तमाम ऐबों से पाक और मुनज़्ज़ह है।

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