कुरान - 52:37 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
أَمۡ عِندَهُمۡ خَزَآئِنُ رَبِّكَ أَمۡ هُمُ ٱلۡمُصَۜيۡطِرُونَ

Transliteration: (Am'indahum khazaaa'inu rabbika am humul musaitiroon)

या उनके पास तुम्हारे रब के ख़ज़ाने हैं? या वे (उन ख़ज़ानों के) मुतसल्लिफ़ व हाकिम बनाए गए हैं [44]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 37

"या उनके पास तुम्हारे रब के ख़ज़ाने हैं? या वे (उन ख़ज़ानों के) मुतसल्लिफ़ व हाकिम बनाए गए हैं [44]?"


[44] कुफ़्फ़ार के एअतराज़ात का रद्द और अल्लाह का मुतलक़ इख़्तियार

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िरों को इस बात पर जलन थी कि नबुव्वत हुज़ूर ﷺ को क्यों मिली:

  • नबुव्वत रब्बानी अता है: काफ़िर कहते थे कि मक्का या ताइफ़ के किसी मालदार सरदार को नबी क्यों नहीं बनाया गया? अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि क्या अल्लाह की रहमत और नबुव्वत के ख़ज़ाने तुम्हारे क़ब्ज़े में हैं कि जिसे चाहो बाँटो?
  • अल्लाह का मुतलक़ इख़्तियार: अल्लाह तआला तमाम ख़ज़ानों का मालिक है, वह अपनी नबुव्वत और रहमत के लिए जिसे चाहे मुंतख़ब फ़रमाए। किसी को उसके फ़ैसले पर एअतराज़ करने का कोई हक़ नहीं।

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