कुरान - 52:40 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
أَمۡ تَسۡـَٔلُهُمۡ أَجۡرٗا فَهُم مِّن مَّغۡرَمٖ مُّثۡقَلُونَ

Transliteration: (Am tas'aluhum ajran fahum mim maghramim musqaloon)

क्या आप उनसे कोई उजरत (मुआवज़ा) माँगते हैं कि वे तावान के बोझ तले दबे जा रहे हैं [47]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 40

"क्या आप उनसे कोई उजरत (मुआवज़ा) माँगते हैं कि वे तावान के बोझ तले दबे जा रहे हैं [47]?"


[47] नबी ﷺ की बे-ग़रज़ दावत और काफ़िरों का झूठा बोहतान

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िरों का यह सोचना कि नबी ﷺ दुनियावी नफ़ा चाहते हैं, सरासर बातिल है:

  • बे-लौस दावत: हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ ने अपनी उम्मत को जो अज़ीम दीन दिया, उसके बदले में कभी किसी से एक पाई का भी सवाल नहीं किया।
  • तावान का कोई बोझ नहीं: काफ़िरों पर कोई ऐसा टैक्स या जुर्माना नहीं लगाया गया था जिसके बोझ से वे परेशान हों। इसके बावजूद उनका ईमान न लाना सिर्फ़ उनकी बदबख़्ती और दुश्मनी का नतीजा था।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now