कुरान - 52:31 सूरह अत-तूर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
قُلۡ تَرَبَّصُواْ فَإِنِّي مَعَكُم مِّنَ ٱلۡمُتَرَبِّصِينَ

Transliteration: (Qul tarabbasoo fa innee ma'akum minal mutarabbiseen)

(ऐ हबीब!) आप फ़रमा दीजिए: "तुम इंतिज़ार करते रहो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतिज़ार करने वालों में हूँ [38]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तूर आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अत-तूर तफ़सीर - आयत 31

"(ऐ हबीब!) आप फ़रमा दीजिए: 'तुम इंतिज़ार करते रहो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतिज़ार करने वालों में हूँ [38]!'"


[38] अज़ाब-ए-इलाही का इंतिज़ार और काफ़िरों की हलाकत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हुज़ूर ﷺ ने काफ़िरों को दो-टूक जवाब दिया:

  • अज़ाब का अटल आना: हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया कि अगर तुम मेरे ज़वाल के झूठे ख़्वाब देख रहे हो, तो तुम भी इंतिज़ार करो और मैं भी देखता हूँ कि अल्लाह तआला का क़हर तुम पर कब नाज़िल होता है।
  • दुनियावी हलाकत: चुनाँचे अल्लाह तआला का यह वादा पूरा हुआ और जिन काफ़िरों ने हुज़ूर ﷺ की मुख़ालफ़त की थी, वे सब आप ही की मुक़द्दस हयात-ए-ज़ाहिरी में बदर और दीगर मवाक़े पर ज़लील व ख़्वार होकर हलाक हुए।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now