Transliteration: (Fazakkir famaaa anta bini'mati rabbika bikaahininw wa laa majnoon)
"तो (ऐ हबीब!) आप नसीहत फ़रमाते रहिए [34], क्योंकि अपने रब के फ़ज़्ल व करम से आप न काहिन (ग़ैब के झूठे दावेदार) हैं और न मजनूँ [35]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने अपने महबूब ﷺ को दावत-ओ-तबलीग़ जारी रखने का हुक्म दिया:
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िर हुज़ूर ﷺ पर जो बातिल इल्ज़ाम लगाते थे, यह आयत उसका मुँह-तोड़ जवाब देती है:
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