Transliteration: (Allazee ja'ala lakumul arda mahdanw wa ja'ala lakum feehaa subulan la'allakum tahtadoon)
"वही जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को बिछौना (गहवारा) बनाया [12], और उसमें तुम्हारे लिए रास्ते बनाए [13] ताकि तुम सही राह पा सको;"
यह आयत ज़मीन के सुकून और क़रार को निहायत ख़ूबसूरती से बयान करती है, और इसकी मिसाल गहवारे (झूले) से देती है—ऐसी जगह जो इंसानी रिहाइश के लिए पूरी देखभाल के साथ तैयार की गई हो। ज़मीन को फैलाया गया और मज़बूती से क़ायम किया गया, न तो यह लोहे की तरह ऐसी सख़्त है कि इस पर रहना नामुमकिन हो, और न ही पानी की तरह ऐसी डांवाडोल व बे-क़रार है कि इस पर ठहरा न जा सके।
एक सजे-सजाए बिस्तर की तरह, इसमें आराम, हरकत और ज़िंदा रहने की तमाम ज़रूरी चीज़ें मौजूद हैं। मिट्टी की बनावट का तवाज़ुन, ज़मीन की परतें, और क़ुदरती वसाइल की मौजूदगी—ये सब इस इलाही तख़्लीक़ का हिस्सा हैं—जो इंसानी ज़िंदगी के लिए एक मुकम्मल गहवारा है।
जिस तरह ज़मीन पर इंसानों के चलने-फिरने और अपनी मंज़िलों तक पहुंचने के लिए ज़ाहिरी सड़कें और रास्ते बनाए गए हैं, ठीक उसी तरह अल्लाह तआला ने हमारे चलने के लिए रूहानी रास्ते भी मुक़र्रर फ़रमाए हैं।
इनमें से बाज़ रास्ते खुले और वाज़ेह हैं—ये शरीअत की नुमाइंदगी करते हैं, यानी वह इलाही क़ानून जो सीधे तौर पर इताअत और नजात की तरफ़ ले जाता है।
और बाज़ रास्ते बारीक, तंग या पोशीदा हैं—ये तरीक़त की नुमाइंदगी करते हैं, यानी वे गहरे रूहानी सफ़र जो अल्लाह की क़ुर्बत चाहने वाले तय करते हैं।
यह दोनों रास्ते मिलकर अहले-ईमान की न सिर्फ़ दुनियावी सफ़र में, बल्कि आख़िरत के सफ़र में भी रहनुमाई करते हैं, जिससे वे जिस्मानी और रूहानी दोनों एतबार से सही राह पर चलने के क़ाबिल होते हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat