कुरान - 43:11 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
وَٱلَّذِي نَزَّلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءَۢ بِقَدَرٖ فَأَنشَرۡنَا بِهِۦ بَلۡدَةٗ مَّيۡتٗاۚ كَذَٰلِكَ تُخۡرَجُونَ

Transliteration: (Wallazee nazzala minas samaaa'i maaa'am biqadarin fa ansharnaa bihee baldatam maitaa' kazaalika tukhrajoon)

और जिसने आसमान से एक अंदाज़े के मुताबिक़ पानी बरसाया [14], फिर हमने उसके ज़रिए मुर्दा शहर (ज़मीन) को ज़िंदा कर दिया; इसी तरह तुम भी (क़ब्रों से) निकाले जाओगे [15]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 11

"और जिसने आसमान से एक अंदाज़े के मुताबिक़ पानी बरसाया [14], फिर हमने उसके ज़रिए मुर्दा शहर (ज़मीन) को ज़िंदा कर दिया; इसी तरह तुम भी (क़ब्रों से) निकाले जाओगे [15];"

[14] बारिश का नपा-तुला अंदाज़ा और रहमत

अल्लाह तआला आसमान से बारिश को एक मुक़र्ररा मिक़दार और अंदाज़े के साथ नाज़िल फ़रमाता है—न इतनी कम कि कहत और ख़ुश्की पैदा हो जाए, और न इतनी ज़्यादा कि सैलाब बनकर बस्तियों को तबाह कर दे।

इसके ज़रिए वह मुर्दा और बंजर ज़मीन को दोबारा ज़िंदा फ़रमा देता है, जिससे उसमें हरियाली, अनाज और फल उग आते हैं। यह मुसलसल मुशाहिदा इंसान को अल्लाह की बेपायां क़ुदरत और रहमत की याद दिलाता है।

[15] दोबारा ज़िंदा किए जाने (हश्र) की दलील

जिस तरह बारिश के चंद क़तरों से सूखी और मुर्दा ज़मीन दोबारा लहलहा उठती है, ठीक उसी तरह क़यामत के दिन इंसानों को उनकी क़ब्रों से ज़िंदा करके बाहर निकाला जाएगा। जो क़ादिर ज़ात मिट्टी में जान डाल सकती है, वह इंसानों को दोबारा ज़िंदगी बख़्शने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

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