कुरान - 43:15 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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Transliteration: (Wa ja'aloo lahoo min 'ibaadihee juz'aa; innal insaana la kafoorun mubeen (section 1))

और उन्होंने उसके बंदों में से बाज़ को उसका जुज़ (औलाद) ठहरा दिया [23]; बेशक इंसान खुला ना-शुकरा है [24]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 15

"और उन्होंने उसके बंदों में से बाज़ को उसका जुज़ (औलाद) ठहरा दिया [23]; बेशक इंसान खुला ना-शुकरा है [24]!"

[23] औलाद ठहराने का शिर्किया अक़ीदा

मुशरिकीन-ए-अरब फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहते थे। औलाद मां-बाप का एक जुज़ (टुकड़ा) होती है, जबकि अल्लाह तआला अजज़ा और औलाद से पाक व मुनज़्ज़ह है। किसी मख़्लूक़ को अल्लाह का जुज़ या औलाद कहना बदतरीन शिर्क है।

[24] इंसान की खुली ना-शुक्री

तमाम मख़्लूक़ात में से सिर्फ़ ना-शुकरे इंसान ने ही अल्लाह के बारे में ऐसे झूठे और गुस्ताख़ाना दावे किए, हालांकि अल्लाह की रहमत और नेमतें हर लम्हा उस पर बरस रही हैं।

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