कुरान - 43:17 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِمَا ضَرَبَ لِلرَّحۡمَٰنِ مَثَلٗا ظَلَّ وَجۡهُهُۥ مُسۡوَدّٗا وَهُوَ كَظِيمٌ

Transliteration: (Wa izaa bushshira ahaduhum bimaa daraba lir Rahmaani masalan zalla wajhuhoo muswaddanw wa huwa kazeem)

और जब उनमें से किसी को उस चीज़ (बेटी) की ख़ुशख़बरी दी जाती है जिसकी मिसाल उसने रहमान के लिए बयान की थी, तो उसका चेहरा सियाह (काला) पड़ जाता है और वह ग़म से घुटने लगता है [26]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 17

"और जब उनमें से किसी को उस चीज़ (बेटी) की ख़ुशख़बरी दी जाती है जिसकी मिसाल उसने रहमान के लिए बयान की थी, तो उसका चेहरा सियाह (काला) पड़ जाता है और वह ग़म से घुटने लगता है [26]!"

[26] बेटियों की पैदाइश पर ना-गवारी काफ़िरों का तरीक़ा

बेटी की पैदाइश पर रंजीदा होना, चेहरा काला पड़ जाना और ग़म में घुटते रहना काफ़िरों और जाहिलों का शेवा था। इसके बरअक्स, अंबिया-ए-किराम ने नेक औलाद के लिए दुआएं फ़रमाईं।

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने दुआ फ़रमाई: "ऐ अल्लाह, मेरी दुआ सुन ले", और जब उनका बेटा पैदा हुआ तो उन्होंने उसका नाम इस्माईल रखा, जिसका मतलब है "वह जो सुनता है", ताकि उस क़बूल हुई दुआ की याद ताज़ा रहे।

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