कुरान - 43:21 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
أَمۡ ءَاتَيۡنَٰهُمۡ كِتَٰبٗا مِّن قَبۡلِهِۦ فَهُم بِهِۦ مُسۡتَمۡسِكُونَ

Transliteration: (Am aatainaahum Kitaaban min qablihee fahum bihee mustamsikoon)

क्या हमने उन्हें इससे पहले कोई ऐसी किताब दी है जिसे वे मज़बूती से पकड़े हुए हों [34]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 21

"क्या हमने उन्हें इससे पहले कोई ऐसी किताब दी है जिसे वे मज़बूती से पकड़े हुए हों [34]?"

[34] दावों की कोई आसमानी सनद नहीं

यह आयत मुशरिकीन के बहाने को मुस्तरद फ़रमाती है कि क्या उनके पास कोई ऐसी आसमानी किताब मौजूद है जिसकी बुनियाद पर वे शिर्क करते हैं? इसके अलावा, अल्लाह की कोई भी सच्ची किताब कभी बुत-परस्ती या कुफ़्र की इजाज़त या ताईद नहीं कर सकती।

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