Transliteration: (Am aatainaahum Kitaaban min qablihee fahum bihee mustamsikoon)
"क्या हमने उन्हें इससे पहले कोई ऐसी किताब दी है जिसे वे मज़बूती से पकड़े हुए हों [34]?"
यह आयत मुशरिकीन के बहाने को मुस्तरद फ़रमाती है कि क्या उनके पास कोई ऐसी आसमानी किताब मौजूद है जिसकी बुनियाद पर वे शिर्क करते हैं? इसके अलावा, अल्लाह की कोई भी सच्ची किताब कभी बुत-परस्ती या कुफ़्र की इजाज़त या ताईद नहीं कर सकती।
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