कुरान - 43:22 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
بَلۡ قَالُوٓاْ إِنَّا وَجَدۡنَآ ءَابَآءَنَا عَلَىٰٓ أُمَّةٖ وَإِنَّا عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِم مُّهۡتَدُونَ

Transliteration: (Bal qaalooo innaa wajadnaaa aabaaa'anaa 'alaaa ummatinw wa innaa 'alaaa aasaarihim muhtadoon)

बल्कि वे तो कहते हैं: 'हमने अपने बाप-दादा को एक तरीक़े (दीन) पर पाया, और बेशक हम उन्हीं के नक़्शे-क़दम पर राह पा रहे हैं [35]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 22

"बल्कि वे तो कहते हैं: 'हमने अपने बाप-दादा को एक तरीक़े (दीन) पर पाया, और बेशक हम उन्हीं के नक़्शे-क़दम पर राह पा रहे हैं [35]।'"

[35] बाप-दादा की अंधी तक़लीद

यह आयत काफ़िरों की हठधर्मी की असली वजह को बेनक़ाब करती है: यानी अपने बाप-दादा की अंधी तक़लीद। यह सिखाती है कि शरीअत के ख़िलाफ़ रस्मों-रिवाज को अपनाए रखना एक संगीन गुनाह है, ख़्वाह वे रस्में बाप-दादा ही से क्यों न चली आ रही हों।

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