कुरान - 43:27 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
إِلَّا ٱلَّذِي فَطَرَنِي فَإِنَّهُۥ سَيَهۡدِينِ

Transliteration: (Illal lazee fataranee fa innahoo sa yahdeen)

सिवाए उस ज़ात के जिसने मुझे पैदा फ़रमाया, पस बेशक वही मुझे हिदायत फ़रमाता रहेगा [43]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 27

"सिवाए उस ज़ात के जिसने मुझे पैदा फ़रमाया, पस बेशक वही मुझे हिदायत फ़रमाता रहेगा [43]।'"

[43] मुसलसल और कामिल इलाही हिदायत

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने वाज़ेह फ़रमाया कि सिर्फ़ अल्लाह तआला, जिसने उन्हें पैदा फ़रमाया, इबादत के लाएक़ है और वही मुसलसल उनकी रहनुमाई फ़रमा रहा है। तफ़सीर रूहुल बयान के मुताबिक़, हिदायत के लफ़्ज़ में हर्फ़ 'सीन' ताकीद और हाल व मुस्तक़बिल के तसल्सुल को ज़ाहिर करता है, यानी अल्लाह हमेशा उनकी रहनुमाई फ़रमाता रहता है।

यह साबित करता है कि अंबिया-ए-किराम एक लम्हे के लिए भी हिदायत से महरूम नहीं होते। चूंकि उन्होंने खुले तौर पर झूठे माबूदों का इन्कार किया और सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस इताअत का इक़रार किया, इसलिए उनके हिदायत पर होने में कोई भी शक सरासर बे-बुनियाद है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now