कुरान - 43:28 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
وَجَعَلَهَا كَلِمَةَۢ بَاقِيَةٗ فِي عَقِبِهِۦ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Wa ja'alahaa kalimatan baaqiyatan fee 'aqibihee la 'allahum yarji'oon)

और उन्होंने इस (कलिम-ए-तौहीद) को अपनी आने वाली औलाद में हमेशा बाक़ी रहने वाला कलिमा बना दिया ताकि वे (अल्लाह की तरफ़) रुजूअ करते रहें [44]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 28

"और उन्होंने इस (कलिम-ए-तौहीद) को अपनी आने वाली औलाद में हमेशा बाक़ी रहने वाला कलिमा बना दिया ताकि वे (अल्लाह की तरफ़) रुजूअ करते रहें [44]।'"

[44] इब्राहीम अलैहिस्सलाम की तौहीद की जावेदां मीरास

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने झूठे माबूदों से बेज़ारी के खुले ऐलान को अपनी औलाद के लिए एक हमेशा बाक़ी रहने वाली मीरास के तौर पर छोड़ा। उनके बाद हर नबी, हर नेक बंदे और हर मोमिन ने शिर्क के ख़िलाफ़ इस मौक़फ़ को दोहराया है।

यह दिखाता है कि झूठे माबूदों का इन्कार करना इब्राहीम अलैहिस्सलाम के तरीक़े (मिल्लत-ए-इब्राहीम) का हिस्सा है। पस, ऐ मक्का वालो—अगर तुम उनकी पैरवी का दावा करते हो, तो फिर उनकी तालीमात को क्यों छोड़ते हो? यह आयत यह भी वाज़ेह करती है कि गुमराह बाप-दादा की पैरवी करना ग़लत है, लेकिन इब्राहीम अलैहिस्सलाम जैसे नेक आबा-ओ-अज्दाद की इताअत करना एक मुक़द्दस फ़र्ज़ है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now