Transliteration: (Wa ja'alahaa kalimatan baaqiyatan fee 'aqibihee la 'allahum yarji'oon)
"और उन्होंने इस (कलिम-ए-तौहीद) को अपनी आने वाली औलाद में हमेशा बाक़ी रहने वाला कलिमा बना दिया ताकि वे (अल्लाह की तरफ़) रुजूअ करते रहें [44]।'"
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने झूठे माबूदों से बेज़ारी के खुले ऐलान को अपनी औलाद के लिए एक हमेशा बाक़ी रहने वाली मीरास के तौर पर छोड़ा। उनके बाद हर नबी, हर नेक बंदे और हर मोमिन ने शिर्क के ख़िलाफ़ इस मौक़फ़ को दोहराया है।
यह दिखाता है कि झूठे माबूदों का इन्कार करना इब्राहीम अलैहिस्सलाम के तरीक़े (मिल्लत-ए-इब्राहीम) का हिस्सा है। पस, ऐ मक्का वालो—अगर तुम उनकी पैरवी का दावा करते हो, तो फिर उनकी तालीमात को क्यों छोड़ते हो? यह आयत यह भी वाज़ेह करती है कि गुमराह बाप-दादा की पैरवी करना ग़लत है, लेकिन इब्राहीम अलैहिस्सलाम जैसे नेक आबा-ओ-अज्दाद की इताअत करना एक मुक़द्दस फ़र्ज़ है।
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