Transliteration: (Wa qaaloo law laa nuzzila haazal Quraanu 'alaa rajulin minal qaryataini 'azeem)
"और वे बोले: 'यह क़ुरआन इन दो बस्तियों (मक्का और ताइफ़) के किसी बड़े आदमी पर क्यों न उतारा गया [48]?' [49]"
यहाँ दो बस्तियों (शहरों) से मुराद मक्का मुकर्रमा और ताइफ़ हैं। काफ़िरों का यह दावा था कि नबुव्वत का सेहरा मक्का के सरदार वलीद बिन मुग़ीरा या ताइफ़ के रईस उरवा बिन मसऊद सक़फ़ी जैसे मालदार और बा-असर लोगों के सर बंधना चाहिए था।
काफ़िर नबुव्वत के आला मर्तबे को भी दुनियावी दौलत और ज़ाहिरी रुत्बे के तराज़ू में तोलते थे। वे इस बात से पूरी तरह बेख़बर थे कि नबुव्वत अल्लाह का ख़ास अता-कर्दा मंसब है, जो सिर्फ़ ज़ाती पाकीज़गी, रूहानी बुलंदी और आला तरीन अख़लाक़ की बुनियाद पर अता किया जाता है—न कि दुनियावी शान व शौकत या माल व दौलत की बुनियाद पर।
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