कुरान - 43:33 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَلَوۡلَآ أَن يَكُونَ ٱلنَّاسُ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ لَّجَعَلۡنَا لِمَن يَكۡفُرُ بِٱلرَّحۡمَٰنِ لِبُيُوتِهِمۡ سُقُفٗا مِّن فِضَّةٖ وَمَعَارِجَ عَلَيۡهَا يَظۡهَرُونَ

Transliteration: (Wa law laaa any yakoonan naasu ummatanw waahidatan laja'alnaa limany yakfuru bir Rahmaani li buyootihim suqufan min fiddatinw wa ma'aarija 'alaihaa yazharoon)

और अगर यह ख़ौफ़ न होता कि सब लोग एक ही (काफ़िर) उम्मत बन जाएंगे [53], तो जो लोग रहमान के मुनकिर हैं हम उनके घरों की छतें चांदी की बना देते [54] और सीढ़ियां भी जिन पर वे चढ़ते हैं [55], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 33

"और अगर यह ख़ौफ़ न होता कि सब लोग एक ही (काफ़िर) उम्मत बन जाएंगे [53], तो जो लोग रहमान के मुनकिर हैं हम उनके घरों की छतें चांदी की बना देते [54] और सीढ़ियां भी जिन पर वे चढ़ते हैं [55],"

[53] लोगों के कुफ़्र की तरफ़ बहकने का अंदेशा

इंसान की फ़ित्रत कमज़ोर है और वह माल व दौलत की चमक-दमक से बहुत जल्दी मुतास्सिर होता है। अगर अल्लाह तआला काफ़िरों को बे-पनाह दुनियावी दौलत दे देता, तो बहुत से कमज़ोर अक़ीदा लोग दौलत के लालच में कुफ़्र अपना लेते और पूरी इंसानियत गुमराह होकर एक ही काफ़िर गिरोह बन जाती।

[54] चांदी की छतें और महलात

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि दुनियावी दौलत की उसके नज़दीक इतनी भी हैसियत नहीं है जितनी कि एक मच्छर के पर की। अगर हिकमत का तक़ाज़ा न होता तो अल्लाह काफ़िरों के घरों की छतों को ख़ालिस चांदी का बना देता।

[55] चांदी की सीढ़ियां और दुनिया की बे-सबती

और उनके महलों में चांदी की सीढ़ियां बना देता जिन पर वे ऊपर चढ़ते। यह बयान करता है कि दुनियावी ऐश अल्लाह की पसंदीदगी की निशानी नहीं है, बल्कि यह एक आज़माइश और धोखा है।

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