Transliteration: (Wa law laaa any yakoonan naasu ummatanw waahidatan laja'alnaa limany yakfuru bir Rahmaani li buyootihim suqufan min fiddatinw wa ma'aarija 'alaihaa yazharoon)
"और अगर यह ख़ौफ़ न होता कि सब लोग एक ही (काफ़िर) उम्मत बन जाएंगे [53], तो जो लोग रहमान के मुनकिर हैं हम उनके घरों की छतें चांदी की बना देते [54] और सीढ़ियां भी जिन पर वे चढ़ते हैं [55],"
इंसान की फ़ित्रत कमज़ोर है और वह माल व दौलत की चमक-दमक से बहुत जल्दी मुतास्सिर होता है। अगर अल्लाह तआला काफ़िरों को बे-पनाह दुनियावी दौलत दे देता, तो बहुत से कमज़ोर अक़ीदा लोग दौलत के लालच में कुफ़्र अपना लेते और पूरी इंसानियत गुमराह होकर एक ही काफ़िर गिरोह बन जाती।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि दुनियावी दौलत की उसके नज़दीक इतनी भी हैसियत नहीं है जितनी कि एक मच्छर के पर की। अगर हिकमत का तक़ाज़ा न होता तो अल्लाह काफ़िरों के घरों की छतों को ख़ालिस चांदी का बना देता।
और उनके महलों में चांदी की सीढ़ियां बना देता जिन पर वे ऊपर चढ़ते। यह बयान करता है कि दुनियावी ऐश अल्लाह की पसंदीदगी की निशानी नहीं है, बल्कि यह एक आज़माइश और धोखा है।
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