कुरान - 43:34 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
??????????????? ?????????? ????????? ????????? ?????????????

Transliteration: (Wa li buyootihim abwaabanw wa sururan 'alaihaa yattaki'oon)

और उनके घरों के दरवाज़े भी (चांदी के बना देते) और वे तख़्त भी जिन पर वे तकिए लगाकर बैठते हैं [56], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 34

"और उनके घरों के दरवाज़े भी (चांदी के बना देते) और वे तख़्त भी जिन पर वे तकिए लगाकर बैठते हैं [56],"

[56] दुनियावी ठाट-बाट की हक़ीक़त

चांदी के दरवाज़े और सोने-चांदी के तख़्त जिन पर काफ़िर शान व शौकत से तकिए लगाकर बैठते—ये सब चीज़ें अल्लाह के लिए अता करना कोई मुश्किल न था। लेकिन अल्लाह ने मोमिनीन को इस फ़ित्ने से महफ़ूज़ रखने के लिए ऐसा नहीं किया। इससे साबित हुआ कि दौलत की कसरत किसी के हक़ पर होने की दलील नहीं होती।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now