Transliteration: (Wa zukhrufaa; wa in kullu zaalika lammaa mataa'ul hayaatid dunyaa; wal aakhiratu 'inda Rabbika lilmuttaqeen (section 3))
"और सोने की ज़ीनतें भी; और यह सब कुछ तो बस दुनियावी ज़िंदगी का मामूली फ़ायदा है [57]; और आपके रब के नज़दीक आख़िरत [58] सिर्फ़ परहेज़गारों (मुत्तक़ीन) के लिए है [59]।"
सोना, चांदी और दुनियावी आशाइशें सब फ़ानी और आरज़ी हैं। इंसान अपनी मौत के साथ इन सबको यहीं छोड़ जाता है, और आख़िरत में इनमें से कोई चीज़ काम नहीं आती।
दुनियावी ज़िंदगी के आरज़ी फ़ायदे के बरअक्स, आख़िरत की नेमतें हमेशा रहने वाली, कामिल और पाक व साफ़ हैं। वहां न कोई ग़म होगा, न ज़वाल और न मौत।
आख़िरत का यह मुक़द्दस और अज़ीम इनआम सिर्फ़ परहेज़गारों (अहले-तक़वा) के लिए मख़्सूस है, जिन्होंने दुनिया की आरज़ी चमक-दमक के बजाए अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत को तरजीह दी।
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