कुरान - 43:35 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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Transliteration: (Wa zukhrufaa; wa in kullu zaalika lammaa mataa'ul hayaatid dunyaa; wal aakhiratu 'inda Rabbika lilmuttaqeen (section 3))

और सोने की ज़ीनतें भी; और यह सब कुछ तो बस दुनियावी ज़िंदगी का मामूली फ़ायदा है [57]; और आपके रब के नज़दीक आख़िरत [58] सिर्फ़ परहेज़गारों (मुत्तक़ीन) के लिए है [59]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 35

"और सोने की ज़ीनतें भी; और यह सब कुछ तो बस दुनियावी ज़िंदगी का मामूली फ़ायदा है [57]; और आपके रब के नज़दीक आख़िरत [58] सिर्फ़ परहेज़गारों (मुत्तक़ीन) के लिए है [59]।"

[57] दुनियावी ज़ीनत की फ़ना

सोना, चांदी और दुनियावी आशाइशें सब फ़ानी और आरज़ी हैं। इंसान अपनी मौत के साथ इन सबको यहीं छोड़ जाता है, और आख़िरत में इनमें से कोई चीज़ काम नहीं आती।

[58] आख़िरत की हमेशा बाक़ी रहने वाली नेमतें

दुनियावी ज़िंदगी के आरज़ी फ़ायदे के बरअक्स, आख़िरत की नेमतें हमेशा रहने वाली, कामिल और पाक व साफ़ हैं। वहां न कोई ग़म होगा, न ज़वाल और न मौत।

[59] मुत्तक़ीन के लिए ख़ास कामयाबी

आख़िरत का यह मुक़द्दस और अज़ीम इनआम सिर्फ़ परहेज़गारों (अहले-तक़वा) के लिए मख़्सूस है, जिन्होंने दुनिया की आरज़ी चमक-दमक के बजाए अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत को तरजीह दी।

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